समय…
आज का इंसान हर वक्त एक ही बात कहता है — “मेरे पास समय नहीं है…”
पर सच पूछो, तो समय कहीं गया ही नहीं… बस हम उससे दूर हो गए हैं।
एक दौर था जब बैंक की लाइन में खड़े-खड़े लोग अजनबी से अपने बन जाते थे…
चिट्ठियां आने में दिन लगते थे, मगर उन चिट्ठियों में भावनाएं सांस लेती थीं…
गांव की गलियों में लोग घंटों बैठकर बतियाते थे, बिना घड़ी देखे…
तब जिंदगी धीमी थी… मगर दिल भरे हुए थे।
और आज…
सब कुछ मोबाइल में सिमट गया है।
एक क्लिक में पैसा ट्रांसफर…
एक मैसेज में हालचाल…
और एक स्क्रीन में पूरी दुनिया…
फिर भी…
दिल खाली है…
रिश्ते अधूरे हैं…
और हर किसी के पास एक ही बहाना है — “समय नहीं है…”
अजीब विडंबना है…
नेटफ्लिक्स देखने का समय है,
आईपीएल के हर मैच की अपडेट है,
सोशल मीडिया पर घंटों स्क्रोल करने की आदत है…
पर खुद के लिए समय नहीं…
अपने लोगों के लिए समय नहीं…
हमने समय को नहीं खोया…
हमने प्राथमिकताएं खो दी हैं।
याद रखिए…
जिस दिन यह समय सच में हाथ से निकल जाएगा,
उस दिन ना मोबाइल काम आएगा… ना पैसा… ना कोई बहाना…
तब सिर्फ एक टीस रह जाएगी —
“काश… थोड़ा समय अपने लिए निकाला होता…”
“काश… अपनों के साथ कुछ पल हंस लिए होते…”
जिंदगी की सबसे बड़ी सच्चाई यही है —
समय कभी रुकता नहीं…
पर जो पल हम जी लेते हैं, वही हमेशा के लिए ठहर जाते हैं।
इसलिए…
आज भी मौका है…
थोड़ा सा समय खुद को दीजिए…
थोड़ा सा अपने अपनों को…
क्योंकि अंत में…
यादें ही बचती हैं, और यादें समय से बनती हैं…