“रसोई से दिल तक का सफर”
कभी ध्यान दिया है…
जब घर में मेहमान आते हैं, तो सबसे पहले एक औरत का दिल जागता है…
वो सिर्फ खाना नहीं बनाती,
वो अपनी भावनाएँ, अपना समय, अपनी थकान, और अपना पूरा प्यार हर व्यंजन में घोल देती है।
रसोई में खड़े-खड़े उसके पैर दर्द करते हैं,
हाथ जलते हैं, पसीना बहता है…
पर चेहरे पर मुस्कान रहती है।
क्योंकि उसे खुशी होती है कि कोई उसके हाथ का खाना खाकर खुश होगा।
वो हर डिश में सिर्फ स्वाद नहीं डालती,
बल्कि अपने दिल का एक टुकड़ा परोसती है…
लेकिन अफसोस,
हम खाते वक्त यह सब भूल जाते हैं…
हम सिर्फ स्वाद देखते हैं,
और अगर थोड़ा सा भी नमक कम-ज्यादा हो जाए,
तो “धन्यवाद” कहने के बजाय
हम तुरंत कमी निकाल देते हैं।
उस एक शब्द से एक छोटी सी शिकायत से
वो अंदर से टूट जाती है…
क्योंकि उसने जो बनाया था,
वो सिर्फ खाना नहीं था… वो उसका प्यार था।
कभी ठहर कर यह महसूस कीजिए…
कि आपके सामने जो थाली सजी है,
वो किसी के घंटों की मेहनत, त्याग और प्यार का परिणाम है।
उसमें सिर्फ मसाले नहीं,
बल्कि अनगिनत कोशिशें और दिल से की गई देखभाल भी शामिल है।
क्योंकि
खाना पेट भरता है,
लेकिन सराहना किसी का दिल भर देती है।