ज़िंदगी तुम्हारे बिना भी चलती रहेगी — तो खुद के लिए कब जियोगे?
ज़रा ठहर कर सोचो…जब तुम इस दुनिया से चले जाओगे,कुछ दिन तक लोग रोएंगे… तुम्हें याद करेंगे…फिर धीरे-धीरे सब सामान्य हो जाएगा।तुम्हारे घर में वही चूल्हा जलेगा,तुम्हारे हाथों से बनाए
ज़रा ठहर कर सोचो…जब तुम इस दुनिया से चले जाओगे,कुछ दिन तक लोग रोएंगे… तुम्हें याद करेंगे…फिर धीरे-धीरे सब सामान्य हो जाएगा।तुम्हारे घर में वही चूल्हा जलेगा,तुम्हारे हाथों से बनाए
आज की तेज़ रफ्तार 21वीं सदी में इंसान ने बहुत कुछ पा लिया है सुविधाएं, पैसा, नाम और पहचान…लेकिन अगर कुछ सबसे ज़्यादा खोया है, तो वह है रिश्तों की
21वीं सदी के आज के रिश्ते-नाते एक सच्चाई, एक बदलाव, एक समझ 21वीं सदी में रिश्तों का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है।पहले जहां रिश्ते जिम्मेदारी, धैर्य और समझ पर
समय… आज का इंसान हर वक्त एक ही बात कहता है — “मेरे पास समय नहीं है…”पर सच पूछो, तो समय कहीं गया ही नहीं… बस हम उससे दूर हो
“रसोई से दिल तक का सफर” कभी ध्यान दिया है…जब घर में मेहमान आते हैं, तो सबसे पहले एक औरत का दिल जागता है…वो सिर्फ खाना नहीं बनाती,वो अपनी भावनाएँ,